Wednesday, May 20, 2020

रूमी की खुशबू

एक धागा है दिल से होठो  तक

जहा जीवन का रहस्य बुना है

शब्द तोड़ते है धागे को

पर मौन मे   

रहस्य बोलते हैं ।।।

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सबसे चालाक  वह है जो कभी भी

 खुद को  धोखा नही देता

क्योंकि उसने दगाबाज मन को ही

 धोखा दे दिया  है ।।।
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Thursday, April 16, 2020

क्यों किसी को घर से निकलते ही
   मिल जाती हैं मन्जिलें
 और क्यो कोई  जन्मों -जन्मों तक
सफर में भटकता है ??

क्यों कोई तड़पता है, पुरजोर कोशिशें करता है
  अज्ञान  के  अंधेरे से,
                       बाहर आने की ?
और  फिर  क्यों किसी  को
इन्ही अंधेरों में जीने में मजा आता है ??

क्यों है  मेरा मन -बुद्धि और चित्त
   दूसरे  से अलग ?
जबकि ये मेरा - सबका अन्तर्मन
एक ही  स्त्रोत  से उपजा है  !!

मेरे कर्मों के लिए यदि
  मेरा अन्त:करण उत्तरदायी है?
तो  फिर  मेरे अन्त:करण की
रचना का  दायित्व  कौन  उठाता है  ??

मेरी क्षुद्रबुद्धि इन  प्रश्नों में
 उलझ -उलझ जाती है
प्रकृति  के पक्षपात का रहस्य
कभी ना समझ पाती है !!

हे  अतिप्रिय  गुरुदेव  !!
नतमस्तक हो प्रार्थना करती हूँ!!
समाधान  कीजिए  मेरे संशयो का
क्योंकि  इस  भटकते  मन  को
केवल और  केवल
आपकी कृपा का प्रकाश  ही
ठहरा पाता है  !!
               

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Sunday, April 12, 2020

    "  शुभारंभ "

जो चिरकाल  तक रहते है ,निद्रा के वश मे
   कैसे जान पाएंगे कि,
                            कुछ अमृत -सा बरसता है
                                         प्रभात की बेला मे !!
वे कभी नही जान पाएंगे,
    कैसे  तब पूर्व  का आकाश,
         रंग  बदलता है,
    कैसे    पहले  भगवा फिर  गुलाबी,
     और  फिर   रक्तिम  हो जाता है!!
       ऐसे  मे   पाश्र्व संगीत  पक्षियों का,
          इस  सुखद अनुभव को चार चांद लगाता है !!
तो  फिर    आओ   चले 
    एक शुभारंभ करे     
दिव्यता प्रकृति की,  
         मेरे -तुम्हारे  हृदय को,
भर दे  उल्लास और  ऊर्जा से,
   ऐसा कुछ प्रयास करें 

तो  आओ जागे  भोर की  पावन  बेला मे
  और  स्वागत  करे
    एक  नूतन  दिवस का, 
     प्रणाम करे  सूर्यदेव की  रश्मियों को,
       जो प्राणों से भर देती है  
        सृष्टि  के  जीवों को ।।।।
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