" शुभारंभ "
जो चिरकाल तक रहते है ,निद्रा के वश मे
कैसे जान पाएंगे कि,
कुछ अमृत -सा बरसता है
प्रभात की बेला मे !!
वे कभी नही जान पाएंगे,
कैसे तब पूर्व का आकाश,
रंग बदलता है,
कैसे पहले भगवा फिर गुलाबी,
और फिर रक्तिम हो जाता है!!
ऐसे मे पाश्र्व संगीत पक्षियों का,
इस सुखद अनुभव को चार चांद लगाता है !!
तो फिर आओ चले
एक शुभारंभ करे
दिव्यता प्रकृति की,
मेरे -तुम्हारे हृदय को,
भर दे उल्लास और ऊर्जा से,
ऐसा कुछ प्रयास करें
तो आओ जागे भोर की पावन बेला मे
और स्वागत करे
एक नूतन दिवस का,
प्रणाम करे सूर्यदेव की रश्मियों को,
जो प्राणों से भर देती है
सृष्टि के जीवों को ।।।।

















जो चिरकाल तक रहते है ,निद्रा के वश मे
कैसे जान पाएंगे कि,
कुछ अमृत -सा बरसता है
वे कभी नही जान पाएंगे,
कैसे तब पूर्व का आकाश,
रंग बदलता है,
कैसे पहले भगवा फिर गुलाबी,
और फिर रक्तिम हो जाता है!!
ऐसे मे पाश्र्व संगीत पक्षियों का,
इस सुखद अनुभव को चार चांद लगाता है !!
तो फिर आओ चले
एक शुभारंभ करे
दिव्यता प्रकृति की,
मेरे -तुम्हारे हृदय को,
भर दे उल्लास और ऊर्जा से,
ऐसा कुछ प्रयास करें
तो आओ जागे भोर की पावन बेला मे
और स्वागत करे
एक नूतन दिवस का,
प्रणाम करे सूर्यदेव की रश्मियों को,
जो प्राणों से भर देती है
सृष्टि के जीवों को ।।।।
बहुत सुंदर भाव
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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