क्यों किसी को घर से निकलते ही
मिल जाती हैं मन्जिलें
और क्यो कोई जन्मों -जन्मों तक
सफर में भटकता है ??
क्यों कोई तड़पता है, पुरजोर कोशिशें करता है
अज्ञान के अंधेरे से,
बाहर आने की ?
और फिर क्यों किसी को
इन्ही अंधेरों में जीने में मजा आता है ??
क्यों है मेरा मन -बुद्धि और चित्त
दूसरे से अलग ?
जबकि ये मेरा - सबका अन्तर्मन
एक ही स्त्रोत से उपजा है !!
मेरे कर्मों के लिए यदि
मेरा अन्त:करण उत्तरदायी है?
तो फिर मेरे अन्त:करण की
रचना का दायित्व कौन उठाता है ??
मेरी क्षुद्रबुद्धि इन प्रश्नों में
उलझ -उलझ जाती है
प्रकृति के पक्षपात का रहस्य
कभी ना समझ पाती है !!
हे अतिप्रिय गुरुदेव !!
नतमस्तक हो प्रार्थना करती हूँ!!
समाधान कीजिए मेरे संशयो का
क्योंकि इस भटकते मन को
केवल और केवल
आपकी कृपा का प्रकाश ही
ठहरा पाता है !!
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
मिल जाती हैं मन्जिलें
और क्यो कोई जन्मों -जन्मों तक
सफर में भटकता है ??
क्यों कोई तड़पता है, पुरजोर कोशिशें करता है
अज्ञान के अंधेरे से,
बाहर आने की ?
और फिर क्यों किसी को
इन्ही अंधेरों में जीने में मजा आता है ??
क्यों है मेरा मन -बुद्धि और चित्त
दूसरे से अलग ?
जबकि ये मेरा - सबका अन्तर्मन
एक ही स्त्रोत से उपजा है !!
मेरे कर्मों के लिए यदि
मेरा अन्त:करण उत्तरदायी है?
तो फिर मेरे अन्त:करण की
रचना का दायित्व कौन उठाता है ??
मेरी क्षुद्रबुद्धि इन प्रश्नों में
उलझ -उलझ जाती है
प्रकृति के पक्षपात का रहस्य
कभी ना समझ पाती है !!
हे अतिप्रिय गुरुदेव !!
नतमस्तक हो प्रार्थना करती हूँ!!
समाधान कीजिए मेरे संशयो का
क्योंकि इस भटकते मन को
केवल और केवल
आपकी कृपा का प्रकाश ही
ठहरा पाता है !!
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